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mpin kya hota hai

MPIN क्या होता है

आज के डिजिटल युग में करीब-करीब सभी काम डिजिटल माध्यमों से होने लगे हैं। इससे न केवल समय बचता है बल्कि काम भी आसानी और पूरी पारदर्शिता के साथ होता है। इसी क्रम में बहुत सारे दूसरे कामों की तरह ही अब पैसे का लेनदेन भी डिजिटल माध्यमों से संभव हो गया है।

अपने बैंक खाते को मोबाइल नंबर से जोड़कर अब हम घर बैठे मोबाइल बैंकिंग के ज़रिये पैसों का लेनदेन मात्र कुछ ही देर में बड़ी आसानी के साथ कर सकते हैं। मोबाइल बैंकिंग के लिये हमें एम-पिन (mpin) यानी यानी ‘मोबाइल बैंकिंग पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर’ की जरूरतहोती है। बिना इसके हम मोबाइल बैंकिंग का लाभ नहीं उठा सकते। यह मोबाइल बैंकिंग के ज़रिये होने वाले लेनदेन को सुरक्षित बनाता है।

MPIN क्यों जरूरी है 

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आजकल जैसे-जैसे दुनिया दिनोंदिन तकनीकी रूप से विकसित होती जा रही है, डिजिटल और साइबर फ्रॉड के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। मोबाइल बैंकिंग पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर यानी ‘MPIN’ सुरक्षित व सटीक मोबाइल बैंकिंग सुनिश्चित करता है। इसलिये यह मोबाइल से डिजिटल लेनदेन के लिये अनिवार्य कर दिया गया है।

एटीएम कोड की तरह ही एम-पिन (mpin) भी एक यूनीक कोड होता है, जो मोबाइल बैंकिंग के दौरान पैसों का सुरक्षित लेनदेन अर्थात् ‘सेफ़ ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन’ सुनिश्चित करता है। इसीलिये मोबाइल बैंकिंग के ज़रिये लेनदेन के लिये एम-पिन (MPIN) जरूरी ही नहीं बल्कि अनिवार्य होता है।

दूसरे शब्दों में कहा जाय तो एम-पिन (MPIN)चार या किसी-किसी बैंक के लिये छः अंकों का एक ‘सिक्योरिटी-कोड’ होता है, जो आपकी मोबाइल बैंकिंग गतिविधियों की सुरक्षा करता है। इसीलिये यह कोड सबसे बताया नहीं जाता। क्योंकि इससे आपके खाते के साथ धोखाधड़ी भी हो सकती है।

बैंक-खातों से छेड़छाड़ और फ्रॉड के मामलों में अक्सर गोपनीय कोड लीक होना भी एक बड़ी वज़ह बनती है। इस कोड को गोपनीय बनाए रखने की जिम्मेदारी खुद आप पर ही होती है।

Mobile Transaction में एम-पिन MPIN की आवश्यकता

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जैसा कि हम जानते हैं, एम-पिन (MPIN) मोबाइल बैंकिंग के ज़रिये लेनदेन करने के दौरान काम आता है। इस तरह के डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिये सरकार ने मोबाइल बैंकिंग के दोतरफा प्रमाणीकरण की व्यवस्था कर दी है।

यानी कि जैसे हम अपने एटीएम कार्ड और उसके गुप्त पिनकोड की मदद से अपने संबंधित बैंक के खाते से पैसे निकालते हैं, वैसे ही ऑनलाइन बैंकिंग के लिये भी अब पहले आवेदक के बैंक खाते से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का ऑथेंटिफ़िकेशन होता है। इसके बाद ही एम-पिन (MPIN) के ज़रिये सुरक्षित मोबाइल बैंकिंग संभव हो पाती है।

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MPIN का इस्तेमाल किस-किस तरह के Transaction में किया जा सकता हैmpin kya hota hai

महत्व के साथ ही हमें यह भी जानना चाहिये कि एम-पिन (MPIN) का उपयोग किन प्रकार के ट्रांज़ैक्शन्स में किया जाता है। इसके लिये सनद रहे कि एम-पिन का प्रयोग मोबाइल बैंकिंग, आईवीआर, यूपीआई एप्लीकेशन, IMPS, SMS बैंकिंग और USSD बैंकिंग में किया जाता है।

MPIN के फ़ायदे

एम-पिन(MPIN) यानी ‘मोबाइल बैंकिंग पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर’ से उपभोक्ताओं को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे–

  • यह एक सुरक्षा कोड है, जो आपके द्वारा मोबाइल बैंकिंग के ज़रिये किये जाने वाले लेनदेन को सुरक्षित रखता है, इससे पैसों के लेनदेन में एक पारदर्शिता और प्रामाणिकता आती है।
  • एम-पिन (MPIN) महज चार या छः अंकों का एक कोड होता है, जो अपनी सुविधानुसार मोबाइल पर USSD अथवा UPI एप के ज़रिये खुद ही ‘क्रिएट’ किया जा सकता है।
  • जेनरेट होने के बाद सही एम-पिन (MPIN) दर्ज किये बिना आपके खाते से कोई ट्रांज़ैक्शन संभव नहीं होगा,
  • आवेदक अपने मोबाइल के माध्यम से बैंक द्वारा भी एम-पिन (MPIN) प्राप्त कर सकता है।
  • MPIN कैसे प्राप्त करें

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MPIN पाने के दो रास्ते हैं

  • — पहला तो यह कि आप अपने मोबाइल बैंकिंग का रजिस्ट्रेशन करायें। जिसके बाद बैंक आपको यूज़र आईडी और एम-पिन (MPIN) प्रदान कर देता है।
  • — और दूसरा रास्ता यह है कि आप BHIM एप, UPI, USSD का इस्तेमाल करते हुये खुद ही अपना एम-पिन (MPIN) जेनरेट कर सकते हैं।

USSD द्वारा एम-पिन MPIN Generate करने का तरीका

आप निम्नलिखित तरीक़े से USSD द्वारा खुद से एमपिन (MPIN) जेनरेट कर सकते हैं –

  •  सबसे पहले *99# डायल करें,
  •  अब USSD सर्विस के शुरू होते ही बैंक से लिंक करें,
  •  बैंक से लिंक करने के लिये अपने बैंक के आईएफएससी कोड के शुरूआती चार अंक व बैंक के नाम के पहले तीन अक्षर टाइप करके भेजना होता है,
  •  इसके बाद अगले मेन्यू पर सात(7) अंक टाइप कर भेज देना है,
  •  अब एम-पिन (MPIN) जेनरेट करने के लिये एक नंबर(1) का चयन करें और भेज दें। इसके बाद अपनी सहूलियत से एम-पिन डालकर उसे सबमिट कर दें।
  •  एमपिन (MPIN) जेनरेट करने की बजाय बदलना हो तो ‘1’ की बजाय ‘2’ टाइप करके भेजें।
  •  इसके बाद दिये गये निर्देशों के अनुसार आप अपना एम-पिन (MPIN) बदल सकते हैं। जिसके लिये आपको पहले अपना पुराना और फिर नया एमपिन डालना होगा; और फिर कन्फर्म करने को नया एम-पिन एक बार और यानी कुल दो बार दर्ज करना होगा।
  •  अब यह नया एमपिन ही मान्य होगा।
  •  इस तरह आप अपने से नया एम-पिन (MPIN) जेनरेट कर सकते हैं, अथवा उसे बदल सकते हैं।

SBI UPI Application का प्रयोग करके एमपिन MPIN जेनरेट करने का तरीका

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  •  सबसे पहले SBI UPI एप में लॉग इन करें,
  •  लॉग इन होने के बाद ‘एकाउंट-मैनेजमेंट’ पर जायें,
  •  अब जिस एकाउंट के लिये एमपिन जेनरेट करना चाहते हैं उसको चुनें,
  •  इसके बाद सेट-एमपिन विकल्प चुनें, और वहां पर दिये गये निर्देशों के अनुसार नया एमपिन (MPIN) जेनरेट कर लें।

यहां खासतौर पर समझने की खातिर SBI UPI एप्लीकेशन की मिसाल दी गई है; पर एमपिन (MPIN) जेनरेट करने की प्रक्रिया सभी बैंकों के ‘यूपीआई एप्स’ पर करीब-करीब एकसमान ही है।

MPIN भूल जायें तो क्या करें 

अगर संयोगवश आप अपना एमपिन भूल जाते हैं तो इसके लिये बहुत चिंता करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आप कभी भी कहीं भी नया एमपिन (MPIN) जेनरेट कर सकते हैं। आप इसके लिये नेट-बैंकिंग, USSD बैंकिंग अथवा UPI एप्लीकेशन्स का इस्तेमाल करते हुए आसानी के साथ नया एमपिन जेनरेट कर सकते हैं।

इसमें नेट-बैंकिंग के तहत नया एमपिन जेनरेट करने का तरीका हर बैंक में भले ही अलग-अलग हो, पर USSD व UPI एप्लीकेशन्स पर यह प्रक्रिया करीब-करीब एक जैसी ही है।

निष्कर्ष 

इस तरह हम देख सकते हैं कि एमपिन (MPIN) मोबाइल बैंकिंग में सुरक्षित लेनदेन सुनिश्चित करने वाला एक सुरक्षा-कोड है। जिसके बगैर आप मोबाइल बैंकिंग का लाभ नहीं उठा सकते। इसलिये डिजिटल लेनदेन में एमपिन कोड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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